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Employees' Compensation इंश्योरेंस

Code on Social Security, 2020 के Chapter VII के तहत काम के दौरान लगी चोट पर कर्मचारियों को मुआवज़ा देने की employer की देनदारी: कौन कवर है, मुआवज़े का हिसाब कैसे लगता है, क्लेम और दंड, और employees' compensation पॉलिसी इस देनदारी का बीमा कैसे करती है।

5 लेसनतथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026
  1. 01आज का कानून: Code on Social Security, Chapter VIIभारत में काम के दौरान लगी चोट के मुआवज़े पर अब कौन-सा कानून लागू है: Code on Social Security, 2020 का Chapter VII, 2026 के Central Rules, competent authority, और यह स्थिति 1923 के Act के तहत लिखी पुरानी किताबों और नोट्स से कैसे अलग है।
  2. 02कौन कवर है और Employer कब ज़िम्मेदार हैCode on Social Security, 2020 के Chapter VII में employee किसे गिना जाता है, यह Employees' State Insurance के साथ कैसे बैठता है, employer की देनदारी किस आधार पर बनती है, और छूटें और उनकी सीमाएँ।
  3. 03मुआवज़े का हिसाब कैसे लगता हैCode on Social Security, 2020 की section 76 के तहत मुआवज़े का हिसाब कैसे लगता है: मौत, permanent total और partial disablement और temporary disablement के फ़ॉर्मूले, उम्र का factor, इलाज का खर्च और अंतिम संस्कार के लिए जमा रकम।
  4. 04क्लेम, देरी, अपील और दंडCode on Social Security, 2020 के Chapter VII की प्रक्रिया: सूचना और क्लेम के लिए दो साल की अवधि, मौत के मामलों में रकम जमा करना, देरी पर ब्याज और damages, High Court में अपील, employer की जानकारी देने की ज़िम्मेदारी, और अपराध।
  5. 05देनदारी का बीमा: Employees' Compensation PolicyEmployees' Compensation insurance पॉलिसी, Code on Social Security, 2020 के Chapter VII के तहत employer की देनदारी का बीमा कैसे करती है: यह क्या कवर करती है, बाज़ार के चलन में प्रीमियम कैसे निकलता है, आम exclusions, और wording में देखने वाली बातें।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।