Cross-Border टैक्स — Foreign Dividends, Tax Credit और US Estate Tax
विदेशी शेयर सीधे रखने पर टैक्स के दो ऐसे सवाल आते हैं जो घरेलू निवेशक के सामने नहीं आते: जब विदेश में भी टैक्स कट चुका हो तो foreign dividends पर भारत में टैक्स कैसे लगता है, और क्या उस होल्डिंग पर US estate tax लग सकता है। इस लेसन में दोनों की बात है।
Worldwide income और foreign dividends
जो व्यक्ति resident (और ordinarily resident) है, उस पर भारत में दुनिया भर की income (worldwide income) पर टैक्स लगता है। इसलिए सीधे रखे गए विदेशी शेयरों का dividend उसकी total income में जुड़ता है और उस पर व्यक्ति के slab rate से टैक्स लगता है।
दूसरा देश भी dividend चुकाने से पहले उसमें से टैक्स काट सकता है। इससे dividend भारत में टैक्स से मुक्त नहीं हो जाता: उस पर यहाँ टैक्स लगता ही है, और विदेशी टैक्स की राहत क्रेडिट के ज़रिए मिलती है।
Foreign tax credit कैसे काम करता है
Dividend पर विदेश में पहले चुकाया गया टैक्स, उसी income पर लगने वाले भारतीय टैक्स में से क्रेडिट के रूप में क्लेम किया जा सकता है, संबंधित tax treaty के तहत या Act के अपने राहत वाले नियमों के तहत (Income-tax Act, 2025 के sections 159 और 160; 1961 Act के sections 90 और 91)। इस तरह income पर दो बार पूरा टैक्स नहीं लगता।
क्रेडिट की एक ऊपरी सीमा है: यह उस income पर लगने वाले भारतीय टैक्स तक सीमित है। इसे तय फ़ॉर्म (prescribed form) में, विदेशी टैक्स के सबूत के साथ, 1 अप्रैल 2026 से लागू नियमों के तहत क्लेम किया जाता है। पुरानी किताबों और नोट्स में Form 67 का ज़िक्र मिलता है, जो पहले के नियमों का फ़ॉर्म था।
US estate tax
Estate tax उस पर लगता है जो कोई व्यक्ति मौत के समय छोड़ जाता है। United States इसे उन US-situated assets पर लगाता है, जैसे US-incorporated कंपनियों के शेयर, जो ऐसे व्यक्ति के पास हों जो न US citizen है और न US resident। ऐसे व्यक्ति के लिए छूट सिर्फ़ USD 60,000 की है।
US citizens और residents को मिलने वाली कहीं बड़ी छूट, 2026 के लिए USD 15 million, यहाँ लागू नहीं होती, और भारत की US के साथ कोई estate-tax treaty नहीं है।
क्या US-situated asset नहीं है
Non-US कंपनियों के शेयर US-situated assets नहीं हैं। विदेश में निवेश करने वाले भारतीय mutual fund की यूनिट भी नहीं हैं: निवेशक के पास एक भारतीय स्कीम की यूनिट होती हैं, और विदेशी securities स्कीम के पास होती हैं।
नियम एक नज़र में
US estate tax के लिए कौन सी होल्डिंग गिनी जाती हैं
हेमंत 58 साल के हैं और एक निवासी भारतीय हैं जो US citizen नहीं हैं। उनके अपने नाम पर US-incorporated कंपनियों के USD 110,000 के शेयर हैं, non-US कंपनियों के USD 40,000 के शेयर हैं, और एक भारतीय mutual fund स्कीम की यूनिट हैं जो US शेयरों में निवेश करती है। ये कीमतें सिर्फ़ उदाहरण के लिए मानी हुई हैं।
इनमें से सिर्फ़ पहली होल्डिंग उनकी US-situated asset है। यह छूट से 110,000 − 60,000 = USD 50,000 ऊपर है, इसलिए इस होल्डिंग पर US estate tax लग सकता है। बाकी दो होल्डिंग US-situated assets नहीं हैं, उनकी कीमत चाहे जितनी हो।
Dividend पर foreign tax credit
- एक निवासी (resident) को ₹1,00,000 का foreign dividend मिलता है, जिसमें से ₹25,000 टैक्स विदेश में कट चुका है। 25% की दर सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए मानी गई है; असली दर देश और treaty पर निर्भर करती है। Surcharge और cess को यहाँ नहीं गिना गया है।
- स्थिति A, slab rate 30%: dividend पर भारतीय टैक्स है 30% × 1,00,000 = ₹30,000। विदेशी टैक्स का क्रेडिट: ₹25,000। भारत में चुकाना है: ₹30,000 − ₹25,000 = ₹5,000।
- स्थिति B, slab rate 20%: dividend पर भारतीय टैक्स है 20% × 1,00,000 = ₹20,000। क्रेडिट उस भारतीय टैक्स तक सीमित है, इसलिए यह ₹20,000 है, ₹25,000 नहीं। भारत में चुकाना है: कुछ नहीं। विदेशी टैक्स के बचे हुए ₹25,000 − ₹20,000 = ₹5,000 का कोई क्रेडिट नहीं मिलता।
नतीजा। Dividend पर कुल टैक्स स्थिति A में ₹30,000 है (₹25,000 विदेश में और ₹5,000 भारत में) और स्थिति B में ₹25,000। दोनों में से किसी भी स्थिति में उस पर दो बार पूरा टैक्स नहीं लगता, और किसी में भी वह भारत में टैक्स से मुक्त नहीं है।
मुख्य बातें
- Foreign dividends पर निवासी (resident) के हाथ में slab rates से टैक्स लगता है; विदेश में कटा टैक्स उन्हें भारत में टैक्स से मुक्त नहीं करता।
- विदेशी टैक्स का क्रेडिट उस income पर लगने वाले भारतीय टैक्स में से मिलता है, उसी टैक्स तक सीमित, और तय फ़ॉर्म (prescribed form) में क्लेम किया जाता है (पहले के नियमों में Form 67)।
- जो व्यक्ति न US citizen है और न US resident, उसे US-situated assets पर सिर्फ़ USD 60,000 की US estate tax छूट मिलती है।
- भारत की US के साथ कोई estate-tax treaty नहीं है; भारतीय mutual funds की यूनिट और non-US कंपनियों के शेयर निवेशक के US-situated assets नहीं हैं।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- विदेश में टैक्स कट जाने से भारत में बात खत्म नहीं हो जाती। Dividend पर यहाँ slab rate से टैक्स फिर भी लगता है, और विदेशी टैक्स का क्रेडिट मिलता है।
- Foreign tax credit की सीमा है। यह उस income पर लगने वाले भारतीय टैक्स से ज़्यादा नहीं हो सकता।
- USD 15 million की US estate tax छूट ऐसे निवासी भारतीय को नहीं मिलती जो US citizen नहीं है। US-situated assets पर छूट USD 60,000 है।
लोग अक्सर पूछते हैं
क्या foreign dividend पर दो बार टैक्स लगता है?
पूरा दो बार नहीं। उस पर विदेश में पहले चुकाया गया टैक्स भारतीय टैक्स में से क्रेडिट के तौर पर घटा दिया जाता है, पर उस भारतीय टैक्स की रकम तक ही।
क्रेडिट किस फ़ॉर्म में क्लेम किया जाता है?
उस फ़ॉर्म में जो 1 अप्रैल 2026 से लागू नियमों के तहत तय किया गया है; Form 67 पहले के नियमों का फ़ॉर्म था।
क्या भारत की US के साथ कोई estate-tax treaty है?
नहीं।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- Income-tax Act, 2025 — sections 159 और 160 (विदेशी टैक्स पर राहत; 1961 Act के sections 90 और 91)
- US Internal Revenue Service — ऐसे non-residents के लिए estate tax जो US citizen नहीं हैं
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (7 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

