Maturity और Survival Benefit के क्लेम
Maturity और survival benefit क्या हैं, traditional और unit-linked प्लान में रकम कैसे निकलती है, बीमा कंपनी को कब सूचना देनी और कब भुगतान करना होता है, assignment का भुगतान पर क्या असर पड़ता है, और यह रकम कब इनकम टैक्स से मुक्त होती है।
Maturity और survival benefit
Maturity क्लेम तब बनता है जब life assured policy term के आखिर तक जीवित रहता है और पॉलिसी में दिया गया maturity benefit चुकाने का समय आ जाता है। Survival benefit अलग चीज़ हैं: ये वे भुगतान हैं जो money-back और ऐसे ही दूसरे प्लान में term के दौरान, policy schedule में तय अंतराल पर, किए जाते हैं।
हर पॉलिसी में दोनों में से कोई एक हो, यह ज़रूरी नहीं। जिस pure term प्लान में return-of-premium की खूबी नहीं है, उसमें कोई maturity benefit नहीं होता; अगर life assured term के बाद जीवित रहे, तो कवर खत्म हो जाता है और कुछ नहीं मिलता।
रकम कैसे निकलती है
Participating endowment या money-back प्लान में maturity benefit sum assured और पॉलिसी में जुड़े बोनस को मिलाकर होता है। Money-back प्लान में survival benefit schedule की तारीखों पर चुकाए जाते हैं; आखिरी भुगतान के बारे में schedule जो कहता है, उसी से maturity की रकम तय होती है।
ULIP में maturity benefit fund value होती है: पास मौजूद यूनिट को maturity की तारीख की net asset value से गुणा करने पर जो रकम आए। इसलिए उस तारीख तक यह बाज़ार के साथ ऊपर-नीचे होती रहती है।
बीमा कंपनी कब सूचना देती है और कब भुगतान करती है
ये प्रोडक्ट IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024 के तहत आते हैं। 5 सितंबर 2024 के Master Circular on Protection of Policyholders' Interests के Citizens' Charter के तहत, बीमा कंपनी पॉलिसीधारक को maturity या survival के भुगतान की सूचना भुगतान की तय तारीख से एक महीने पहले देती है और उसी तारीख पर भुगतान करती है। पहले के 2017 के regulations में सिर्फ़ इतना लिखा था कि सूचना काफ़ी पहले भेजी जानी चाहिए।
जहाँ पॉलिसी लोन की security के तौर पर लोन देने वाले के नाम assign की गई है, वहाँ लोन देने वाला मिलने वाली रकम में से अपना बकाया पाने का हकदार है, और बाकी रकम पॉलिसीधारक को मिलती है। Absolute assignment अलग है: उसमें पॉलिसी के सारे अधिकार assignee के पास चले जाते हैं। Assignment Insurance Act, 1938 के section 38 के तहत चलता है।
मिलने वाली रकम पर इनकम टैक्स
छूट Income-tax Act, 2025 के section 11 में है, Schedule II के साथ पढ़ने पर (1961 के Act का section 10(10D))। 1 अप्रैल 2012 से जारी पॉलिसी में सालाना प्रीमियम sum assured के 10% के भीतर होना चाहिए; 1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 तक जारी पॉलिसी के लिए यह आँकड़ा 20% है, और 1 अप्रैल 2013 से जारी उन पॉलिसी के लिए 15% जो specified disability या बीमारी वाले व्यक्ति के जीवन पर हैं।
कुल प्रीमियम की लिमिट भी लागू होती हैं: 1 फ़रवरी 2021 से जारी ULIP के लिए साल में ₹2,50,000 का प्रीमियम, और 1 अप्रैल 2023 से जारी दूसरी पॉलिसी के लिए साल में ₹5,00,000। मृत्यु पर मिलने वाली रकम पर हमेशा छूट है।
नियम एक नज़र में
Assign की गई पॉलिसी पर maturity का भुगतान
उदाहरण (रकमें मानी हुई हैं): गोपाल की endowment पॉलिसी की maturity 1 दिसंबर को होती है। बीमा कंपनी 1 नवंबर तक उन्हें भुगतान के बारे में लिखती है। Maturity की रकम ₹8,70,000 है।
गोपाल ने पॉलिसी लोन की security के तौर पर एक बैंक के नाम assign की थी, और ₹2,50,000 अब भी बकाया हैं। बैंक को ₹2,50,000 मिलते हैं और गोपाल को बाकी रकम, ₹8,70,000 − ₹2,50,000 = ₹6,20,000, भुगतान की तय तारीख पर मिलती है।
Maturity पर एक money-back प्लान और एक ULIP (रकमें सिर्फ़ उदाहरण के लिए)
- मान लीजिए (सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए)। Money-back प्लान: sum assured ₹10,00,000, term 16 साल; schedule साल 4, 8 और 12 के आखिर में sum assured का 15% देता है, और बाकी 55% बोनस के साथ maturity पर; maturity तक जुड़े बोनस ₹3,20,000 माने गए हैं, जो एक माना हुआ आँकड़ा है, कोई अनुमान नहीं। ULIP: 12,500 यूनिट; maturity की तारीख पर NAV ₹48.60।
- हर survival benefit = ₹10,00,000 का 15% = ₹1,50,000। तीन चुकाए जाते हैं, इसलिए कुल 3 × ₹1,50,000 = ₹4,50,000।
- Maturity पर बाकी sum assured = ₹10,00,000 का 55% = ₹5,50,000।
- Money-back प्लान का maturity benefit = ₹5,50,000 + ₹3,20,000 = ₹8,70,000।
- ULIP का maturity benefit = 12,500 यूनिट × ₹48.60 = ₹6,07,500।
नतीजा। इन मानी हुई बातों पर money-back प्लान survival benefit में ₹4,50,000 और maturity पर ₹8,70,000 देता है। ULIP ₹6,07,500 देता है, जो maturity की तारीख की fund value है।
मुख्य बातें
- Maturity benefit term के बाद जीवित रहने पर मिलता है; survival benefit term के दौरान policy schedule की तारीखों पर चुकाए जाते हैं।
- Participating प्लान sum assured और बोनस देता है; ULIP यूनिट को maturity की तारीख की NAV से गुणा करके रकम देता है।
- बीमा कंपनी भुगतान की तय तारीख से एक महीने पहले पॉलिसीधारक को सूचना देती है और उसी तारीख पर भुगतान करती है।
- लोन की security के तौर पर assign की गई पॉलिसी में लोन देने वाला अपना बकाया लेता है और बाकी रकम पॉलिसीधारक को मिलती है।
- Maturity की रकम पर टैक्स की छूट सिर्फ़ Schedule II की प्रीमियम वाली शर्तों के भीतर है; मृत्यु पर मिलने वाली रकम पर हमेशा छूट है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- Money-back प्लान का आखिरी भुगतान maturity benefit है, एक और survival benefit नहीं।
- Maturity की रकम पर हर मामले में छूट नहीं है: प्रीमियम Schedule II की लिमिट के भीतर होना चाहिए, जबकि मृत्यु पर मिलने वाली रकम पर हमेशा छूट है।
- लोन की security के तौर पर किया गया assignment absolute assignment नहीं है: मिलने वाली रकम में से सिर्फ़ लोन देने वाले का बकाया लिया जाता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
₹20 लाख का 20 साल का money-back प्लान साल 5, 10 और 15 के आखिर में sum assured का 20% देता है। Survival benefit कुल कितने होते हैं?
हर एक ₹20 लाख का 20% = ₹4 लाख है, और तीन चुकाए जाते हैं, इसलिए ₹12 लाख। साल 20 का भुगतान maturity benefit है।
ULIP की maturity value कैसे निकाली जाती है?
पास मौजूद यूनिट को maturity की तारीख की net asset value से गुणा करके।
क्या पॉलिसीधारक को यह जानने के लिए क्लेम करना पड़ता है कि पॉलिसी की maturity हो रही है?
नहीं। बीमा कंपनी को maturity के भुगतान की सूचना भुगतान की तय तारीख से एक महीने पहले भेजनी होती है, और भुगतान उसी तारीख पर होना होता है।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024
- IRDAI Master Circular on Protection of Policyholders' Interests (5 सितंबर 2024) — Citizens' Charter
- Insurance Act, 1938 — section 38 (assignment)
- Income-tax Act, 2025 — section 11, Schedule II के साथ पढ़ने पर
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

