SEBI (Mutual Funds) Regulations — एक नज़र में
SEBI (Mutual Funds) Regulations, 2026, 1 अप्रैल 2026 से भारत के हर mutual fund के नियमों की किताब (rulebook) हैं। इस पाठ में बताया गया है कि ये कहाँ से आते हैं, इनमें क्या-क्या आता है, और ढाँचे और खर्च के कौन-से मुख्य नियम ये तय करते हैं।
नियमों की यह किताब कहाँ से आती है
Mutual fund दूसरों का पैसा निवेश करता है। इसलिए कानून तय करता है कि mutual fund कौन चला सकता है, पैसा कैसे निवेश होगा, क्या खर्च लिया जा सकता है और क्या-क्या बताना (disclose करना) ज़रूरी है। भारत में नियमों की यह किताब Securities and Exchange Board of India (SEBI) बनाता है, SEBI Act, 1992 के तहत।
SEBI के पहले mutual fund Regulations 1993 में आए और 1996 में बदले गए। SEBI (Mutual Funds) Regulations, 2026 ने 1 अप्रैल 2026 से 1996 वाले Regulations की जगह ली। इन्हें SEBI के 20 मार्च 2026 के Master Circular के साथ पढ़ा जाता है। जो मटीरियल 1996 के Regulations को आज का नियम बताता है, वह पुराना पड़ चुका है।
Regulations में क्या-क्या आता है
इनमें registration, sponsor, trustees और asset management company (AMC) की भूमिकाएँ, स्कीम का launch, निवेश की सीमाएँ, valuation, खर्च और disclosures आते हैं। हर mutual fund को इन्हें मानना होता है।
कुछ जाने-पहचाने नियम Regulations में नहीं, सर्कुलर में हैं। Scheme categories SEBI के 26 फ़रवरी 2026 के सर्कुलर से आती हैं, जो 40 categories तय करता है: 13 equity, 17 debt, 7 hybrid, 1 life-cycle और 2 other।
तीन स्तर और उनके बचाव के इंतज़ाम
Mutual fund के तीन स्तर होते हैं: sponsor, trustees और AMC। Sponsor दो में से किसी एक रास्ते से शर्तें पूरी कर सकता है। Route 1 में financial services में पाँच साल का रिकॉर्ड माँगा जाता है, और AMC की net worth कम से कम ₹50 करोड़ होनी चाहिए। Route 2 में sponsor के लिए मुनाफ़े की कोई शर्त नहीं है, लेकिन AMC को registration के समय ₹150 करोड़ और बाद में ₹100 करोड़ चाहिए।
Sponsor के पास AMC की net worth का कम से कम 40% होना चाहिए, ताकि कारोबार में उसका अपना असली पैसा लगा रहे। यह बात उलटी तरफ़ से भी लागू है: जिसके भी पास AMC का 40% या उससे ज़्यादा हो, उसे sponsor माना जाता है और उसे sponsor बनने की शर्तें पूरी करनी होती हैं।
Trustees unitholders की तरफ़ से AMC पर निगरानी रखते हैं। इसलिए trustee company के कम से कम दो-तिहाई directors, और उसका chair, independent होने चाहिए।
खर्च के नियम, और रेगुलेशन क्या नहीं कर सकता
Total expense ratio (TER) = base expense ratio + brokerage + transaction cost + statutory levies। Brokerage की ऊपरी सीमा cash market में trade value का 0.06% और derivatives में 0.02% है।
रेगुलेशन गलत कामों पर लगाम लगाता है और disclosure ज़रूरी बनाता है। यह स्कीम से market risk नहीं हटाता: यूनिट की कीमत अब भी portfolio के साथ ऊपर-नीचे होती है।
नियम एक नज़र में
पुरानी गाइड और नए नियम (उदाहरण)
निखिल इंदौर में कॉमर्स का छात्र है और एक पुरानी गाइड से पढ़ाई दोहरा रहा है। उसमें लिखा है कि mutual funds पर 1996 के Regulations लागू हैं, sponsor की net worth ₹5 करोड़ होनी चाहिए और 36 scheme categories हैं।
तीनों बातें पुरानी पड़ चुकी हैं। अब 2026 के Regulations लागू हैं। इनमें sponsor के लिए ₹5 करोड़ वाला कोई नियम नहीं है; net worth की रकमें AMC पर लागू होती हैं और sponsor के route पर निर्भर करती हैं। 2026 के सर्कुलर में 40 categories हैं।
40% की हिस्सेदारी और brokerage की सीमा (उदाहरण)
- मान लीजिए (सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए): Route 1 वाली एक AMC की net worth ₹80 करोड़ है, और उसकी एक स्कीम cash market में ₹5 करोड़ की trade value के शेयर खरीदती है।
- Sponsor की कम से कम हिस्सेदारी = 40% × ₹80 करोड़ = ₹32 करोड़।
- Brokerage की ऊपरी सीमा = 0.06% × ₹5 करोड़ = ₹30,000।
नतीजा। Sponsor के पास AMC की net worth में से कम से कम ₹32 करोड़ होने चाहिए, और इस खरीद पर brokerage ₹30,000 से ज़्यादा नहीं हो सकती।
मुख्य बातें
- 2026 के Regulations ने 1 अप्रैल 2026 से 1996 के Regulations की जगह ली; SEBI के पहले Regulations 1993 के हैं।
- Mutual fund के तीन स्तर होते हैं: sponsor, trustees और AMC।
- Sponsor के पास AMC की net worth का कम से कम 40% होता है; जिसके पास 40% या उससे ज़्यादा हो, उसे sponsor माना जाता है।
- Trustee company के कम से कम दो-तिहाई directors, और उसका chair, independent होने चाहिए।
- 40 scheme categories SEBI के 26 फ़रवरी 2026 के सर्कुलर से आती हैं, Regulations से नहीं।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- Sponsor की net worth ₹5 करोड़ होने का कोई नियम नहीं है, हालाँकि पुराने मटीरियल में ऐसा लिखा मिलता है। ये रकमें AMC पर लागू होती हैं और sponsor के route पर निर्भर करती हैं।
- Brokerage base expense ratio के अंदर नहीं आती। यह उससे बाहर, अपनी अलग सीमाओं के भीतर ली जाती है।
- SEBI के रेगुलेशन से कोई स्कीम बिना जोखिम की नहीं हो जाती। यूनिट की कीमत गिर सकती है।
लोग अक्सर पूछते हैं
ये Regulations किस कानून के तहत बने हैं?
Securities and Exchange Board of India Act, 1992।
Master Circular क्या है?
यह एक ही document है जिसमें SEBI ने mutual fund के अपने सर्कुलर इकट्ठे किए हैं। Regulations को 20 मार्च 2026 के Master Circular के साथ पढ़ा जाता है, जिसमें scheme categorisation भी शामिल है।
Trustee company के ज़्यादातर directors का independent होना क्यों ज़रूरी है?
Trustees unitholders के लिए AMC पर निगरानी रखते हैं। इसलिए board के ज़्यादातर सदस्यों का sponsor और AMC से कोई संबंध नहीं होना चाहिए।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- Securities and Exchange Board of India Act, 1992
- SEBI (Mutual Funds) Regulations, 2026 — regulation 5 (sponsor) और regulations 66 और 67 (खर्च)
- SEBI Master Circular for Mutual Funds (20 मार्च 2026) — Chapter 3 (categorisation, SEBI के 26 फ़रवरी 2026 के सर्कुलर से)
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

