हेल्थ इंश्योरेंस पर IRDAI के दिशानिर्देश
वे नियम जो IRDAI आज हेल्थ इंश्योरेंस पर लगाता है: ये कहाँ मिलते हैं, क्या तय करते हैं (waiting period की ऊपरी सीमाएँ, moratorium, free-look, portability, cashless और क्लेम की समय-सीमाएँ), हर प्रोडक्ट पर क्या छोड़ते हैं, और standard Arogya Sanjeevani पॉलिसी।
नियम कहाँ हैं
IRDAI, यानी Insurance Regulatory and Development Authority of India, वे नियम तय करता है जो सभी बीमा कंपनियों में हेल्थ इंश्योरेंस के कामकाज को एक जैसा बनाते हैं। इनमें portability, standard exclusions, waiting period की ऊपरी सीमा, cashless और क्लेम की समय-सीमाएँ, और standard प्रोडक्ट आते हैं। मौजूदा ढाँचा मुख्य रूप से IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024 हैं, जो 1 अप्रैल 2024 से लागू हैं, और 29 मई 2024 का Master Circular on Health Insurance Business।
इन्होंने IRDAI (Health Insurance) Regulations, 2016 और पहले के कई सर्कुलर की जगह ली। इसलिए जो जानकारी पुराने नियमों का हवाला देती है, वह पुरानी हो चुकी है।
खरीदार को बचाने वाले नियम
हर पॉलिसी के साथ Customer Information Sheet आनी चाहिए। एक साल या उससे ज़्यादा की अवधि वाली पॉलिसी में policy document मिलने से 30 दिन का free-look period होता है, बिक्री का channel चाहे जो हो, और इस दौरान पॉलिसी लौटाई जा सकती है।
Pre-existing disease waiting period और specific-disease waiting period 36 महीने से ज़्यादा नहीं हो सकते; पुरानी जानकारी में pre-existing disease के लिए 48 महीने लिखे मिलते हैं। लगातार 60 महीने के कवर के बाद, जिसे moratorium कहते हैं, non-disclosure या misrepresentation के आधार पर पॉलिसी या क्लेम पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, जब तक धोखाधड़ी साबित न हो।
Portability से पॉलिसीधारक रिन्यूअल पर दूसरी बीमा कंपनी में जा सकता है, पहले से कमाया waiting period का credit खोए बिना, port हुए sum insured की हद तक। मौजूदा बीमा कंपनी 72 घंटे के भीतर data देती है और नई बीमा कंपनी 5 दिन के भीतर फ़ैसला करती है। पिछले क्लेम की वजह से रिन्यूअल से मना नहीं किया जा सकता।
क्लेम के नियम
बीमा कंपनी को cashless authorisation के अनुरोध पर तुरंत फ़ैसला करना होता है, और किसी भी हाल में उसे पाने के एक घंटे के भीतर। डिस्चार्ज पर final authorisation अस्पताल के अनुरोध के तीन घंटे के भीतर देना होता है; इससे ज़्यादा समय लगे, तो अस्पताल का अतिरिक्त खर्च बीमा कंपनी उठाती है। पुरानी जानकारी में दो घंटे या उससे ज़्यादा लिखा मिलता है।
Reimbursement क्लेम जमा होने के 15 दिन के भीतर settle करना होता है; पहले यह सीमा 30 दिन थी। देरी होने पर बैंक रेट से 2% ज़्यादा की दर से ब्याज देना होता है।
बीमा कंपनियों और intermediaries के खिलाफ़ शिकायतें IRDAI के पोर्टल Bima Bharosa पर दर्ज और track की जा सकती हैं, जो Integrated Grievance Management System (IGMS) के बाद आया है। पोर्टल शिकायत को बीमा कंपनी के पास भेजता है; IRDAI खुद अलग-अलग क्लेम का फ़ैसला नहीं करता।
Arogya Sanjeevani, और नियम क्या खुला छोड़ते हैं
Arogya Sanjeevani वह standard हेल्थ प्रोडक्ट है जिसे IRDAI जनरल और हेल्थ बीमा कंपनियों के लिए देना ज़रूरी करता है। इसकी खासियतें standard हैं, जिससे तुलना सीधी हो जाती है: हर क्लेम पर 5% co-pay, room rent sum insured के 2% तक सीमित (ज़्यादा से ज़्यादा रोज़ ₹5,000) और ICU का खर्च 5% तक (ज़्यादा से ज़्यादा रोज़ ₹10,000)। प्रीमियम, अस्पतालों का नेटवर्क और service फिर भी हर बीमा कंपनी में अलग होते हैं।
बाकी प्रोडक्ट के लिए नियम बाहरी सीमाएँ और समय-सीमाएँ तय करते हैं, लेकिन प्रोडक्ट की खासियतें तय नहीं करते। Room rent की लिमिट, co-pay, deductible और बोनस की दरें हर पॉलिसी खुद तय करती है, और हर क्लेम फिर भी पॉलिसी की शर्तों के आधार पर परखा जाता है।
नियम एक नज़र में
डिस्चार्ज के दिन की घड़ी
उदाहरण: थॉमस सोमवार की शाम कोट्टायम के एक नेटवर्क अस्पताल में भर्ती होते हैं। अस्पताल शाम 7.00 बजे cashless का अनुरोध भेजता है, इसलिए बीमा कंपनी का फ़ैसला रात 8.00 बजे तक आ जाना चाहिए। शुक्रवार को अस्पताल सुबह 10.30 बजे final बिल authorisation के लिए भेजता है; बीमा कंपनी का final authorisation दोपहर 1.30 बजे तक आ जाना चाहिए। अगर वह देर से आए और अस्पताल उन अतिरिक्त घंटों का पैसा लगाए, तो वह अतिरिक्त खर्च बीमा कंपनी को उठाना होता है।
Arogya Sanjeevani की लिमिट, आँकड़ों में
- मान लीजिए (सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए): ऊपर बताई गई standard शर्तों के तहत ₹2,00,000 का sum insured, और ₹90,000 का admissible (यानी पॉलिसी के हिसाब से बनने वाला) क्लेम।
- Room rent की लिमिट: 2% × ₹2,00,000 = रोज़ ₹4,000। यह ₹5,000 की ऊपरी सीमा से कम है, इसलिए लिमिट रोज़ ₹4,000 है।
- ICU की लिमिट: 5% × ₹2,00,000 = रोज़ ₹10,000, जो ₹10,000 की ऊपरी सीमा के बराबर है।
- Co-pay: 5% × ₹90,000 = ₹4,500, जो पॉलिसीधारक उठाता है।
- बीमा कंपनी देती है ₹90,000 − ₹4,500 = ₹85,500।
नतीजा। रोज़ की लिमिट कमरे के लिए ₹4,000 और ICU के लिए ₹10,000; ₹90,000 के admissible क्लेम पर बीमा कंपनी ₹85,500 देती है और पॉलिसीधारक ₹4,500।
मुख्य बातें
- ढाँचा है IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024 और 29 मई 2024 का Master Circular on Health Insurance Business।
- Free-look policy document मिलने से 30 दिन है, बिक्री के हर channel के लिए, एक साल या उससे ज़्यादा की पॉलिसी पर।
- PED और specific-disease waiting period की ऊपरी सीमा 36 महीने है; moratorium 60 महीने का है।
- Cashless के अनुरोध पर एक घंटे के भीतर फ़ैसला होता है और डिस्चार्ज का authorisation तीन घंटे के भीतर दिया जाता है।
- Reimbursement क्लेम जमा होने के 15 दिन के भीतर settle होता है।
- Arogya Sanjeevani 5% co-pay वाला standard प्रोडक्ट है, जिसे देना बीमा कंपनियों के लिए ज़रूरी है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- IRDAI के नियम आम प्रोडक्ट के लिए room rent की लिमिट या co-pay का स्तर तय नहीं करते। ये हर पॉलिसी खुद तय करती है, और सिर्फ़ standard प्रोडक्ट की शर्तें एक जैसी हैं।
- Free-look period इस पर निर्भर नहीं है कि पॉलिसी कैसे खरीदी गई। यह बिक्री के हर channel के लिए 30 दिन है, एक साल या उससे ज़्यादा की अवधि वाली पॉलिसी पर।
- Bima Bharosa क्लेम का फ़ैसला नहीं करता। यह शिकायतों को दर्ज करता है, track करता है और बीमा कंपनी के पास भेजता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
क्या हर बीमा कंपनी Arogya Sanjeevani की एक ही कीमत रखती है?
नहीं। इसकी खासियतें standard हैं, लेकिन प्रीमियम, अस्पतालों का नेटवर्क और service हर बीमा कंपनी में अलग होते हैं।
IGMS क्या है?
Integrated Grievance Management System, IRDAI का पहले वाला शिकायत पोर्टल। इसके बाद Bima Bharosa आया है।
क्या भारी क्लेम वाले साल के बाद बीमा कंपनी रिन्यूअल से मना कर सकती है?
नहीं। पिछले सालों में किए गए क्लेम की वजह से रिन्यूअल से मना नहीं किया जा सकता।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024 (1 अप्रैल 2024 से लागू)
- IRDAI Master Circular on Health Insurance Business (29 मई 2024)
- IRDAI Master Circular on Protection of Policyholders' Interests (5 सितंबर 2024)
- Arogya Sanjeevani — standard प्रोडक्ट की शर्तें, जैसी बीमा कंपनियों के product documents में छपी हैं
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

