Motor Accident Claims Tribunal (MACT)
Motor Accident Claims Tribunal क्या है, इसमें कौन आवेदन कर सकता है, section 164 के तहत बिना गलती साबित किए मिलने वाला तय मुआवज़ा, गलती पर टिके award में multiplier कैसे लगता है, और third-party बीमा कंपनी को कहाँ तक देना पड़ता है।
Tribunal क्या है
Motor Accident Claims Tribunal (MACT) मोटर गाड़ी की दुर्घटनाओं से उठे मुआवज़े के क्लेम पर फ़ैसला करता है। राज्य सरकारें ये Tribunal Motor Vehicles Act, 1988 की section 165 के तहत बनाती हैं।
यह मौत, शारीरिक चोट और संपत्ति के नुकसान के third-party क्लेम सुनता है। आवेदन घायल व्यक्ति, खराब हुई संपत्ति का मालिक, मरने वाले व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधि, या सही तरीके से अधिकार दिया गया एजेंट कर सकता है।
मुआवज़े के दो रास्ते
Section 164, जो 1 अप्रैल 2022 से लागू है, एक तय रकम देती है, जिसमें क्लेम करने वाले को गलती का दावा करना या उसे साबित करना नहीं पड़ता: मौत पर ₹5 लाख और गंभीर चोट (grievous hurt) पर ₹2.5 लाख। इसने पुरानी sections 140 (no-fault liability) और 163A (structured formula) की जगह ली, जो अब सिर्फ़ उस तारीख से पहले की दुर्घटनाओं के लिए मायने रखती हैं।
दूसरा रास्ता गलती पर टिका है: क्लेम करने वाला दिखाता है कि गाड़ी के इस्तेमाल में लापरवाही से दुर्घटना हुई, और Tribunal सबूतों के आधार पर नुकसान आँकता है।
गलती पर टिका award कैसे बनता है
जहाँ नुकसान कमाई का या परिवार के सहारे (dependency) का है, वहाँ Tribunal एक सालाना रकम निकालता है और उसे multiplier से गुणा करता है। Multiplier वह संख्या है जो कमाई के खोए हुए सालों को दिखाती है। अदालतें एक standard table लगाती हैं, जो युवा वयस्कों के लिए 18 से शुरू होती है और हर बड़ी उम्र के band के साथ घटती जाती है, क्योंकि कमाई के कम साल बचते हैं।
अगर पीड़ित की भी कुछ गलती थी, तो मुआवज़ा उसी अनुपात में घटता है: जिस पीड़ित की 20% गलती पाई जाए, उसे 20% कम मिलता है।
बीमा कंपनी को क्या देना पड़ता है
Standard पॉलिसी में third party की मौत या शारीरिक चोट के लिए बीमा कंपनी की liability पर रुपयों की कोई सीमा नहीं है: Tribunal जो award दे, उसके लिए वह ज़िम्मेदार है। सिर्फ़ संपत्ति के नुकसान पर लिमिट है, private-car पॉलिसी में ₹7.5 लाख और दोपहिया पॉलिसी में ₹1 लाख।
मालिक पॉलिसी की शर्तें तोड़े, तो भी आम तौर पर पीड़ित बिना पैसे के नहीं रहता। इस पर सबसे अहम फ़ैसला National Insurance Co. Ltd. v. Swaran Singh (2004) है: बीमा कंपनी पीड़ित के प्रति ज़िम्मेदार बनी रहती है। और जहाँ वह शर्त का टूटना साबित कर दे, जैसे जान-बूझकर बिना लाइसेंस वाले व्यक्ति को गाड़ी चलाने देना, वहाँ Tribunal उसे निर्देश दे सकता है कि वह पहले पीड़ित को पैसा दे और फिर वह रकम मालिक से वसूले।
नियम एक नज़र में
बिना लाइसेंस वाला भतीजा
महेश की इंदौर में एक डिलीवरी वैन है। वे उसे अपने भतीजे को चलाने देते हैं, यह जानते हुए कि उसके पास driving licence नहीं है। वैन से एक पैदल चलने वाले की मौत हो जाती है, और परिवार Tribunal में आवेदन करता है।
बीमा कंपनी साबित करती है कि महेश ने जान-बूझकर वैन बिना लाइसेंस वाले ड्राइवर को दी। Swaran Singh के फ़ैसले के हिसाब से Tribunal आम तौर पर बीमा कंपनी को निर्देश देगा कि वह परिवार को पैसा दे और फिर वह रकम महेश से वसूले। पीड़ित का परिवार सुरक्षित रहता है; शर्त तोड़ने का खर्च मालिक पर पड़ता है।
Multiplier और पीड़ित की अपनी लापरवाही
- एक युवा वयस्क की दुर्घटना में मौत हो जाती है। मान लीजिए Tribunal परिवार का सालाना नुकसान ₹2,40,000 आँकता है (यह मानी हुई रकम है; यह कैसे निकलती है, वह इस नोट के बाहर है)।
- 18 का multiplier: ₹2,40,000 × 18 = ₹43,20,000।
- मरने वाले की 20% गलती पाई जाती है: ₹43,20,000 × 20% = ₹8,64,000।
- इस head में मुआवज़ा = ₹43,20,000 − ₹8,64,000 = ₹34,56,000।
नतीजा। इस head में ₹34,56,000 का award मिलता है; third party की मौत पर रुपयों की कोई सीमा नहीं है, इसलिए गलती करने वाली गाड़ी की बीमा कंपनी इसके लिए ज़िम्मेदार है। मुआवज़े के बाकी heads यहाँ छोड़ दिए गए हैं।
मुख्य बातें
- MACT को राज्य सरकारें Motor Vehicles Act, 1988 की section 165 के तहत बनाती हैं, और यह third-party दुर्घटना के क्लेम सुनता है।
- Section 164 गलती साबित किए बिना मौत पर ₹5 लाख और गंभीर चोट पर ₹2.5 लाख की तय रकम देती है।
- पीड़ित की उम्र बढ़ने के साथ multiplier घटता है; युवा वयस्कों के लिए यह 18 से शुरू होता है।
- पीड़ित की अपनी लापरवाही (contributory negligence) मुआवज़े को उसी अनुपात में घटाती है।
- Third party की मौत या चोट की liability पर रुपयों की कोई सीमा नहीं है; शर्त का टूटना साबित होने पर बीमा कंपनी पीड़ित को पैसा देती है और मालिक से वसूलती है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- Own-damage क्लेम पर अपनी ही बीमा कंपनी से झगड़े के लिए MACT सही जगह नहीं है। यह third-party दुर्घटना के क्लेम सुनता है।
- Sections 140 और 163A अब no-fault के मौजूदा नियम नहीं हैं। 1 अप्रैल 2022 से section 164 ने उनकी जगह ले ली।
- बिना सीमा की liability संपत्ति तक नहीं जाती। Third party की संपत्ति के नुकसान की लिमिट private car के लिए ₹7.5 लाख और दोपहिया के लिए ₹1 लाख है।
लोग अक्सर पूछते हैं
Tribunal में कौन आवेदन कर सकता है?
घायल व्यक्ति, खराब हुई संपत्ति का मालिक, मरने वाले व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधि, या सही तरीके से अधिकार दिया गया एजेंट।
क्या क्लेम करने वाले को हमेशा लापरवाही साबित करनी पड़ती है?
नहीं। Section 164 गलती का दावा किए या उसे साबित किए बिना मौत पर ₹5 लाख और गंभीर चोट पर ₹2.5 लाख की तय रकम देती है।
क्या बीमा कंपनी इसलिए पैसा देने से मना कर सकती है कि ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था?
पीड़ित के मामले में नहीं। जहाँ शर्त का टूटना साबित हो, वहाँ Tribunal आम तौर पर बीमा कंपनी को निर्देश देता है कि वह पीड़ित को पैसा दे और वह रकम मालिक से वसूले।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- Motor Vehicles Act, 1988 — sections 164 और 165
- National Insurance Co. Ltd. v. Swaran Singh, Supreme Court of India (2004)
- Standard motor policy wording — Section II (Liability to Third Parties), third-party संपत्ति के नुकसान की लिमिट
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

