क्लेम का निपटारा (Partial Loss)
जिस own-damage क्लेम में मरम्मत हो सकती है, वह कैसे settle होता है: partial loss किसे गिनते हैं, बदले गए पुर्ज़ों पर depreciation, deductible, cashless का रास्ता, लाइसेंस वाला surveyor कब ज़रूरी है और आज लागू क्लेम की समय-सीमाएँ।
Partial loss क्या है
Partial loss वह नुकसान है जिसकी मरम्मत ठीक-ठाक खर्च में हो सकती है। आम चलन के हिसाब से क्लेम तब partial loss है जब गाड़ी को वापस लाने (retrieval) और मरम्मत का कुल खर्च IDV के 75% से ज़्यादा न हो। उससे ऊपर इसे आम तौर पर constructive total loss माना जाता है, पॉलिसी की शर्तों के हिसाब से।
यह मोटर क्लेम की सबसे आम किस्म है, जो दुर्घटना, तोड़फोड़, प्राकृतिक आपदा और दूसरे बीमित perils से बनता है।
मिलने वाली रकम कैसे बनती है
बीमा मालिक को पहले वाली स्थिति में वापस लाता है; उसे बेहतर नहीं बनाता। पुरानी गाड़ी में नया पुर्ज़ा बेहतरी है, इसलिए बदले गए पुर्ज़ों पर depreciation घटाया जाता है: rubber, nylon और plastic के पुर्ज़ों, tyre, tube और battery पर 50%, fibreglass पर 30% और glass पर कुछ नहीं।
Metal के पुर्ज़ों पर depreciation गाड़ी की उम्र से लगता है: 6 महीने तक कुछ नहीं, 1 साल तक 5%, 2 साल तक 10%, 3 साल तक 15%, 4 साल तक 25%, 5 साल तक 35%, 10 साल तक 40% और उसके बाद 50%।
Depreciation सिर्फ़ वहाँ लगता है जहाँ नया पुर्ज़ा लगा हो। जहाँ पुर्ज़े की मरम्मत हुई हो, जैसे dent निकालकर या welding से, वहाँ मरम्मत की मज़दूरी पर कोई depreciation नहीं लगता। Paint के सामान पर पॉलिसी की शर्तों के तहत अलग से depreciation लगता है। इसके बाद compulsory deductible और कोई voluntary deductible हो तो वह घटाया जाता है।
Cashless और आकलन
Cashless सुविधा सिर्फ़ उन network garages में मिलती है जो बीमा कंपनी के साथ empanelled हैं। बीमा कंपनी बिल का अपना हिस्सा सीधे गैराज को चुकाती है।
₹50,000 से ऊपर के मोटर नुकसान का आकलन IRDAI से लाइसेंस पाए हुए surveyor and loss assessor से कराना ज़रूरी है, Insurance Act, 1938 की section 64UM और IRDAI के surveyor regulations के तहत। छोटे नुकसान का आकलन बीमा कंपनी दूसरे तरीकों से कर सकती है।
आज की समय-सीमाएँ
Retail पॉलिसी के लिए IRDAI के 2024 के Master Circulars यह माँगते हैं: क्लेम की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर surveyor लगाया जाए, surveyor लगने के 15 दिन के भीतर survey report आए, और report मिलने के 7 दिन के भीतर बीमा कंपनी फ़ैसला करे। पुरानी सामग्री में 72 घंटे और 30 दिन लिखे मिलते हैं।
नियम एक नज़र में
मरम्मत या बदलना
जयपुर में पड़ोसी हरप्रीत और सना, दोनों की साढ़े चार साल पुरानी कारों के आगे के दरवाज़े में dent है। हरप्रीत का दरवाज़ा dent निकालकर ठीक हो जाता है। सना का दरवाज़ा बहुत ज़्यादा मुड़ गया है, इसलिए नया दरवाज़ा लगता है।
हरप्रीत के क्लेम में दरवाज़े पर कोई depreciation नहीं लगता, क्योंकि कोई नया पुर्ज़ा नहीं लगा। सना का नया दरवाज़ा metal का पुर्ज़ा है, और गाड़ी 4 साल से ज़्यादा और 5 साल तक पुरानी है, इसलिए उसकी कीमत का 35% घटाया जाता है।
आगे के हिस्से की मरम्मत का हिसाब
- कार 18 महीने पुरानी, 1500 cc से कम, कोई voluntary deductible नहीं। बिल, painting को छोड़कर: plastic bumper ₹8,000; windscreen का glass ₹6,000; metal bonnet ₹12,000; मज़दूरी ₹5,000; कुल ₹31,000।
- Bumper (plastic, 50%): ₹8,000 × 50% = ₹4,000 depreciation। Windscreen (glass): कुछ नहीं।
- Bonnet (metal, गाड़ी 1 साल से ज़्यादा और 2 साल तक, 10%): ₹12,000 × 10% = ₹1,200 depreciation।
- मज़दूरी: कोई depreciation नहीं। कुल depreciation = ₹4,000 + ₹1,200 = ₹5,200।
- आँकी गई रकम = ₹31,000 − ₹5,200 = ₹25,800। इसमें से ₹1,000 का compulsory deductible घटाकर = ₹24,800।
नतीजा। बीमा कंपनी ₹24,800 देती है; मालिक ₹6,200 उठाता है, यानी ₹5,200 का depreciation और ₹1,000 का deductible।
मुख्य बातें
- Partial loss वह नुकसान है जिसकी मरम्मत हो सकती है और जहाँ retrieval और मरम्मत का खर्च IDV के 75% से ज़्यादा नहीं है।
- Depreciation सिर्फ़ बदले गए पुर्ज़ों पर लगता है; जिन पुर्ज़ों की मरम्मत हुई, उन पर नहीं।
- Rubber, nylon, plastic, tyre, tube और battery पर 50%, fibreglass पर 30%, glass पर कुछ नहीं; metal गाड़ी की उम्र पर निर्भर है।
- Cashless settlement सिर्फ़ बीमा कंपनी के network garages में मिलता है।
- ₹50,000 से ऊपर के मोटर नुकसान में लाइसेंस वाला surveyor ज़रूरी है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- कुछ पुरानी सामग्री के उलट, metal के पुर्ज़ों पर भी depreciation लगता है। सिर्फ़ glass पर हर उम्र में कुछ नहीं लगता।
- Cashless का मतलब यह नहीं कि मालिक कुछ नहीं देता। Depreciation, deductible और जो कुछ पॉलिसी में excluded है, वह फिर भी देना होता है।
- Zero Depreciation add-on बदले गए पुर्ज़ों पर depreciation की कटौती हटाता है, deductible या excluded चीज़ों को नहीं। इसके साथ बीमा कंपनी की लिमिट भी आती हैं, आम तौर पर गाड़ी की उम्र पर और साल में क्लेम की गिनती पर।
लोग अक्सर पूछते हैं
18 महीने पुरानी कार में metal का एक panel बदला गया। कितना घटेगा?
10%, जो 1 साल से ज़्यादा और 2 साल तक पुरानी गाड़ी के metal पुर्ज़ों की दर है।
क्या हर क्लेम में लाइसेंस वाला surveyor चाहिए?
नहीं। यह तब ज़रूरी है जब मोटर नुकसान ₹50,000 से ज़्यादा हो; उससे नीचे बीमा कंपनी नुकसान का आकलन दूसरे तरीकों से कर सकती है।
क्या कोई दस्तावेज़ न होने पर क्लेम से मना किया जा सकता है?
बीमा कंपनी सिर्फ़ वे दस्तावेज़ माँग सकती है जो settlement के लिए ज़रूरी हैं, और दस्तावेज़ कम होने की वजह से कोई भी क्लेम खारिज नहीं होना चाहिए।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- India Motor Tariff — बदले गए पुर्ज़ों पर depreciation का schedule और compulsory deductible, जैसे standard मोटर पॉलिसी में चले आए हैं
- Insurance Act, 1938 — section 64UM, और IRDAI के surveyor and loss assessor regulations
- IRDAI Master Circular on General Insurance Business (11 जून 2024)
- IRDAI Master Circular on Protection of Policyholders' Interests (5 सितंबर 2024)
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

