Cashless क्लेम की प्रक्रिया — Pre-authorisation, इलाज के दौरान, डिस्चार्ज
Cashless हेल्थ क्लेम pre-authorisation, इलाज और डिस्चार्ज से होकर कैसे चलता है, बीमा कंपनी के फ़ैसलों के लिए IRDAI ने कौन सी समय-सीमाएँ तय की हैं, और अस्पताल के बिल का कौन सा हिस्सा मरीज़ को फिर भी चुकाना होता है।
Cashless का मतलब
Cashless क्लेम में बीमा कंपनी अस्पताल का admissible (यानी पॉलिसी के हिसाब से बनने वाला) बिल अस्पताल को चुका देती है, सीधे या अपने third-party administrator (TPA) के ज़रिए। मरीज़ को बिल का वह हिस्सा पहले खुद भरकर बाद में वापस क्लेम नहीं करना पड़ता।
Cashless आम तौर पर नेटवर्क अस्पतालों में मिलता है, यानी उन अस्पतालों में जिनका बीमा कंपनी या उसके TPA के साथ करार है। कुछ बीमा कंपनियाँ यह सुविधा दूसरे अस्पतालों में भी देती हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल कहाँ हो सकता है, यह पॉलिसी और बीमा कंपनी की मौजूदा अस्पताल-सूची से तय होता है। बाकी जगहों पर मरीज़ आम तौर पर पहले पैसे भरता है और फिर reimbursement का क्लेम करता है।
Cashless यह बताता है कि बिल कैसे चुकाया जाता है, यह नहीं कि कितना कवर है। अनुरोध को फिर भी पॉलिसी की शर्तों के आधार पर परखा जाता है।
तीन चरण
सबसे पहले pre-authorisation आता है। भर्ती के समय या उससे पहले, अस्पताल का insurance desk बीमा कंपनी या उसके TPA को बताता है कि कौन सा इलाज होना है और उसका अंदाज़न खर्च कितना है। बीमा कंपनी एक रकम मंज़ूर करती है।
इलाज के दौरान मंज़ूर रकम कम पड़ सकती है, जैसे कोई complication आने पर या ज़्यादा दिन रुकने पर। तब अस्पताल enhancement का अनुरोध भेजता है, जिसमें मंज़ूर रकम बढ़ाने को कहा जाता है।
डिस्चार्ज के समय अस्पताल आखिरी बिल के साथ डिस्चार्ज का अनुरोध भेजता है, और बीमा कंपनी अपनी आखिरी मंज़ूरी देती है। अस्पताल मरीज़ से सिर्फ़ वह हिस्सा लेता है जो बीमा कंपनी नहीं चुकाती।
आज की समय-सीमाएँ
IRDAI का Master Circular on Health Insurance Business (29 मई 2024) दो समय-सीमाएँ तय करता है। बीमा कंपनी को cashless मंज़ूरी के अनुरोध पर एक घंटे के भीतर फ़ैसला करना होता है, भर्ती इमरजेंसी में हो या पहले से तय। और अस्पताल के डिस्चार्ज के अनुरोध के तीन घंटे के भीतर उसे डिस्चार्ज की आखिरी मंज़ूरी देनी होती है।
अगर आखिरी मंज़ूरी में तीन घंटे से ज़्यादा लगें, तो देरी की वजह से अस्पताल जो भी ज़्यादा रकम लेता है, वह बीमा कंपनी उठाती है। पुरानी जानकारी में इससे लंबी या अलग-अलग स्तरों वाली समय-सीमाएँ लिखी मिलती हैं, जो अब नियम नहीं हैं।
यही सर्कुलर cashless क्लेम में ज़रूरी दस्तावेज़ अस्पताल से लेने की ज़िम्मेदारी बीमा कंपनी या उसके TPA पर डालता है, पॉलिसीधारक पर नहीं।
मरीज़ फिर भी क्या चुकाता है
Cashless का मतलब यह नहीं कि बिल कुछ नहीं आएगा। मरीज़ वे चीज़ें चुकाता है जिन्हें पॉलिसी non-payable मानती है, और वह co-payment या deductible भी जो पॉलिसी में तय है। बीमा कंपनियाँ आम तौर पर कुछ non-medical consumables, जैसे दस्ताने और मास्क, को non-payable मानती हैं, जब तक पॉलिसी या कोई add-on consumables को कवर न करे।
कौन सी चीज़ें non-payable हैं, यह हर पॉलिसी में अलग होता है, इसलिए पॉलिसी की अपनी सूची ही देखी जाती है। सर्जन की फ़ीस, ICU का खर्च और जाँचें इलाज के मुख्य खर्च हैं, consumables नहीं।
नियम एक नज़र में
एक भर्ती, दो समय-सीमाएँ
उदाहरण: कविता पहले से तय ऑपरेशन के लिए एक नेटवर्क अस्पताल में भर्ती होती हैं। अस्पताल pre-authorisation का अनुरोध सुबह 9:00 बजे भेजता है, इसलिए बीमा कंपनी का फ़ैसला सुबह 10:00 बजे तक आ जाना चाहिए।
डिस्चार्ज के दिन अस्पताल डिस्चार्ज का अनुरोध सुबह 11:00 बजे भेजता है, इसलिए आखिरी मंज़ूरी दोपहर 2:00 बजे तक आ जानी चाहिए। मान लीजिए यह शाम 5:00 बजे आती है और अस्पताल इन ज़्यादा घंटों का खर्च जोड़ देता है। यह ज़्यादा खर्च बीमा कंपनी को उठाना है, कविता को नहीं।
Cashless बिल का बँटवारा (रकमें मानी हुई हैं)
- मान लीजिए (सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए): अस्पताल का आखिरी बिल ₹2,40,000; पॉलिसी में non-payable लिखी चीज़ें ₹6,000; पॉलिसी में 10% co-payment है, जो admissible रकम पर लगता है; कोई deductible या sub-limit लागू नहीं; ₹5,00,000 का sum insured अभी इस्तेमाल नहीं हुआ है।
- Admissible रकम = ₹2,40,000 − ₹6,000 = ₹2,34,000।
- Co-payment = ₹2,34,000 का 10% = ₹23,400।
- बीमा कंपनी अस्पताल को चुकाती है ₹2,34,000 − ₹23,400 = ₹2,10,600।
- मरीज़ चुकाता है ₹6,000 + ₹23,400 = ₹29,400।
- जाँच: ₹2,10,600 + ₹29,400 = ₹2,40,000, यानी पूरा बिल।
नतीजा। इन मानी हुई शर्तों पर बीमा कंपनी अस्पताल को ₹2,10,600 चुकाती है और मरीज़ ₹29,400 चुकाता है। जिस पॉलिसी की non-payable सूची अलग हो या जिसमें co-payment न हो, उसमें बँटवारा अलग होगा।
मुख्य बातें
- Cashless क्लेम में बीमा कंपनी, सीधे या अपने TPA के ज़रिए, admissible बिल अस्पताल को चुका देती है।
- बीमा कंपनी को cashless के अनुरोध पर एक घंटे के भीतर फ़ैसला करना होता है, इमरजेंसी और पहले से तय भर्ती, दोनों में।
- डिस्चार्ज की आखिरी मंज़ूरी डिस्चार्ज के अनुरोध के तीन घंटे के भीतर देनी होती है, और इसके बाद की देरी से अस्पताल का जो ज़्यादा खर्च बनता है, वह बीमा कंपनी उठाती है।
- Non-payable चीज़ें और पॉलिसी में तय co-payment या deductible मरीज़ चुकाता है।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- Cashless का मतलब यह नहीं कि पूरा बिल चुकाया जाएगा। Non-payable चीज़ें और पॉलिसी का co-payment या deductible मरीज़ के ही हिस्से में रहते हैं।
- एक घंटे की समय-सीमा सिर्फ़ इमरजेंसी के लिए नहीं है। यह पहले से तय भर्ती पर भी लागू होती है।
- Cashless का अनुरोध नामंज़ूर होने से क्लेम खत्म नहीं हो जाता। Reimbursement का क्लेम फिर भी जमा किया जा सकता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
Cashless के अनुरोध पर फ़ैसला कौन करता है, अस्पताल या बीमा कंपनी?
बीमा कंपनी, सीधे या अपने TPA के ज़रिए। अस्पताल अनुरोध भेजता है, TPA उसे बीमा कंपनी की ओर से प्रोसेस करता है, और फ़ैसले की ज़िम्मेदारी बीमा कंपनी की ही रहती है।
क्या दस्तानों और मास्क का पैसा मिलता है?
सिर्फ़ वहाँ, जहाँ पॉलिसी या कोई add-on consumables को कवर करता हो। नहीं तो बीमा कंपनियाँ आम तौर पर इन्हें non-payable मानती हैं, और इनका पैसा मरीज़ देता है।
अगर इलाज का खर्च पहले मंज़ूर हुई रकम से ज़्यादा आए तो क्या होता है?
अस्पताल मेडिकल कारणों के साथ enhancement का अनुरोध भेजता है, और बीमा कंपनी या उसका TPA उसे पॉलिसी की शर्तों के आधार पर परखता है।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- IRDAI Master Circular on Health Insurance Business (29 मई 2024) — cashless की मंज़ूरी, डिस्चार्ज की मंज़ूरी और दस्तावेज़ लेना
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

