GIFT City और ग्लोबल निवेश · शुरुआती

International Funds की बुनियाद

International funds क्या हैं, अलग-अलग बाज़ारों और मुद्राओं में निवेश फैलाने (diversification) से क्या होता है और क्या नहीं, विदेश में निवेश के तीन रास्ते, विदेशी फंड पर टैक्स कैसे लगता है, और mutual funds के विदेशी निवेश पर SEBI की लिमिट।

4 लेसनतथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026
  1. 01International Funds क्या हैं?भारत में international fund एक SEBI-regulated mutual fund स्कीम है जो भारत के बाहर की securities में निवेश करती है। इस लेसन में बताया गया है कि ऐसी स्कीम विदेशी संपत्ति किन दो तरीकों से रखती है, निवेशक रुपये में लेन-देन कैसे करते हैं, और घरेलू स्कीम के मुकाबले इसमें क्या अलग तरह से चलता है।
  2. 02International Diversification का मतलब — बाज़ार और मुद्राInternational diversification का मतलब है कुछ ऐसे निवेश रखना जो भारत के अलावा दूसरी अर्थव्यवस्थाओं और बाज़ारों पर निर्भर हों। इस लेसन में बताया गया है कि इससे क्या होता है और क्या नहीं, और रुपये में निवेश करने वाले निवेशक का नतीजा किन दो हिस्सों से बनता है: बाज़ार का बदलाव और मुद्रा का बदलाव।
  3. 03विदेश में निवेश के रास्ते — भारतीय फंड, LRS और GIFT IFSCनिवासी (resident) तीन रास्तों से विदेशी बाज़ारों तक पहुँच सकता है: ऐसी भारतीय mutual fund स्कीम जो विदेश में निवेश करती है, RBI की Liberalised Remittance Scheme के तहत सीधा निवेश, और GIFT IFSC के प्रोडक्ट। इस लेसन में बताया गया है कि हर रास्ता कैसे काम करता है और इनमें फ़र्क कहाँ है।
  4. 04विदेशी फंड पर टैक्स और SEBI की विदेशी लिमिटअक्टूबर 2026 में लागू नियमों के तहत, विदेश में निवेश करने वाली भारतीय mutual fund स्कीम के gains पर टैक्स कैसे लगता है, ऐसी स्कीम टैक्स के लिए equity-oriented fund क्यों नहीं है, और mutual funds के विदेशी निवेश पर SEBI की लिमिट कैसे काम करती हैं।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।