विदेशी फंड पर टैक्स और SEBI की विदेशी लिमिट
अक्टूबर 2026 में लागू नियमों के तहत, विदेश में निवेश करने वाली भारतीय mutual fund स्कीम के gains पर टैक्स कैसे लगता है, ऐसी स्कीम टैक्स के लिए equity-oriented fund क्यों नहीं है, और mutual funds के विदेशी निवेश पर SEBI की लिमिट कैसे काम करती हैं।
Mutual fund यूनिट के लिए टैक्स के तीन खाने
Mutual fund यूनिट पर टैक्स इस पर निर्भर करता है कि स्कीम तीन खानों में से किसमें आती है। Equity-oriented fund कम से कम 65% listed domestic equity shares में रखता है। Specified mutual fund, 1 अप्रैल 2025 से, वह है जो 65% से ज़्यादा debt और money-market instruments में रखता है। बाकी सब कुछ तीसरे खाने में आता है, यानी दूसरे फंड।
International equity fund के लिए बात 'domestic' शब्द से तय होती है। उसमें equity चाहे जितनी हो, वह listed domestic equity नहीं है, इसलिए वह equity-oriented नहीं है। वह 65% से ज़्यादा debt और money-market instruments में भी नहीं रखता, इसलिए वह specified mutual fund भी नहीं है। वह तीसरे खाने में आता है।
दरें (अक्टूबर 2026 की स्थिति)
जैसा आम तौर पर समझा जाता है, international equity fund-of-funds की यूनिट 24 महीने से ज़्यादा रखने पर long-term हो जाती हैं, और तब gain पर बिना indexation के 12.5% टैक्स लगता है। इससे कम समय रखने पर gain short-term होता है, जिस पर निवेशक के slab rate से टैक्स लगता है।
Equity fund वाले नियम लागू नहीं होते: न 12 महीने की holding period, न equity fund वाली दरें, और न long-term gains पर ₹1.25 लाख सालाना की छूट। Indexation 23 जुलाई 2024 को हटा दिया गया। 1 अप्रैल 2025 से पहले खरीदी गई यूनिट के साथ अलग व्यवहार हो सकता है, और यह लेसन उस पर बात नहीं करता।
SEBI की विदेशी लिमिट
टैक्स से अलग, SEBI यह सीमा तय करता है कि mutual funds विदेश में कितना निवेश कर सकते हैं। विदेशी securities के लिए लिमिट हर fund house के लिए USD 1 billion है, पूरी इंडस्ट्री के USD 7 billion के अंदर। विदेशी exchange-traded funds (ETFs) की अलग लिमिट है: हर fund house के लिए USD 300 million, इंडस्ट्री के USD 1 billion के अंदर।
लिमिट पूरी हो जाने पर स्कीम नए निवेश (fresh subscriptions) लेना बंद कर देती हैं। इस रोक का निवेशक की अपनी remittance लिमिट से कोई लेना-देना नहीं है।
नियम एक नज़र में
एक स्कीम जो पैसा नहीं ले रही
किरण 37 साल की हैं और मैसूरु में रहने वाली निवासी (resident) हैं। वे एक overseas fund-of-funds में हर महीने का निवेश शुरू करने की कोशिश करती हैं और पाती हैं कि वह नए निवेश (fresh subscriptions) नहीं ले रहा।
उनके आवेदन में कोई गड़बड़ी नहीं है। SEBI हर fund house के और पूरी इंडस्ट्री के विदेशी निवेश की सीमा तय करता है, और वे लिमिट पूरी हो जाने पर स्कीम नए निवेश रोक देती हैं। इसमें उनकी LRS लिमिट का कोई हाथ नहीं है, क्योंकि भारतीय mutual fund स्कीम में निवेश के लिए कोई remittance नहीं चाहिए।
एक ही gain पर long-term और short-term
- International equity fund-of-funds की यूनिट 10 मई 2025 को ₹4,00,000 में खरीदी जाती हैं और बाद में ₹5,20,000 में बेची जाती हैं। Gain: ₹5,20,000 − ₹4,00,000 = ₹1,20,000। कीमतें मानी हुई हैं, और यह माना गया है कि बेचते समय अक्टूबर 2026 के नियम लागू हैं।
- 20 जून 2027 को बेचने पर, यूनिट 24 महीने से ज़्यादा रखी गई हैं। Gain long-term है: 12.5% × 1,20,000 = ₹15,000।
- इसके बजाय 20 जनवरी 2027 को बेचने पर, यूनिट 24 महीने से कम रखी गई हैं। Gain short-term है और income में जुड़ता है। 30% के माने हुए slab rate पर: 30% × 1,20,000 = ₹36,000।
नतीजा। ₹1,20,000 के उसी gain पर long-term होने पर ₹15,000 टैक्स लगता है, और 30% slab पर short-term होने पर ₹36,000, surcharge और cess से पहले। ₹1.25 लाख की कोई छूट लागू नहीं होती।
मुख्य बातें
- International equity fund टैक्स के लिए equity-oriented नहीं है, क्योंकि उसके लिए कम से कम 65% listed domestic equity में चाहिए, और यह specified mutual fund भी नहीं है।
- जैसा आम तौर पर समझा जाता है: 24 महीने से ज़्यादा रखने पर long-term, बिना indexation के 12.5%; short-term पर slab rates (अक्टूबर 2026 की दरें)।
- 12 महीने की holding period और ₹1.25 लाख की छूट equity-oriented funds की हैं और यहाँ लागू नहीं होतीं।
- SEBI की लिमिट: इंडस्ट्री के USD 7 billion के अंदर हर fund house के लिए USD 1 billion; overseas ETFs के लिए USD 1 billion के अंदर हर fund house के लिए USD 300 million। लिमिट पूरी हो जाने पर स्कीम नए निवेश (fresh subscriptions) रोक देती हैं।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- शेयर रखने भर से कोई स्कीम टैक्स के लिए equity-oriented नहीं हो जाती। शर्त है कम से कम 65% listed domestic equity में।
- International equity fund-of-funds के लिए long-term की सीमा बारह महीने नहीं है। जैसा आम तौर पर समझा जाता है, यह 24 महीने से ज़्यादा है।
- ₹1.25 लाख की छूट इन gains पर लागू नहीं होती। यह equity-oriented funds की है।
लोग अक्सर पूछते हैं
लेसन में 'जैसा आम तौर पर समझा जाता है' क्यों कहा गया है?
क्योंकि यह व्यवहार परिभाषाओं से पढ़कर निकाला गया है: स्कीम न equity-oriented है और न specified mutual fund, इसलिए उस पर दूसरे फंड की तरह टैक्स लगता है। आम तौर पर यही मतलब माना जाता है।
1 अप्रैल 2025 से पहले खरीदी गई यूनिट का क्या?
उनके साथ अलग व्यवहार हो सकता है। यह लेसन 1 अप्रैल 2025 को या उसके बाद खरीदी गई यूनिट की बात करता है।
विदेशी लिमिट एक है या दो?
दो: एक विदेशी securities के लिए और एक अलग लिमिट overseas ETFs के लिए।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- Income-tax Act, 2025 — equity-oriented fund और specified mutual fund की परिभाषाएँ; section 197 (1961 Act का section 112); अक्टूबर 2026 की दरें
- SEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026 — विदेशी निवेश की लिमिट (para 13.11)
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

