Nomination, Assignment और क्लेम
Insurance Act, 1938 के section 39 के तहत nomination और section 38 के तहत assignment कैसे तय करते हैं कि लाइफ पॉलिसी का पैसा किसे मिलेगा, और death व maturity क्लेम settle करने के लिए IRDAI ने अब कौन सी समय-सीमाएँ रखी हैं।
Nomination: पैसा किसे मिलता है
Nomination से पॉलिसीधारक उस व्यक्ति का नाम दर्ज कर सकता है जिसे मृत्यु होने पर पॉलिसी का पैसा मिलेगा। यह Insurance Act, 1938 के section 39 के तहत चलता है। बीमा कंपनी को लिखकर अनुरोध देने से nomination बदला जा सकता है, और इसके लिए मौजूदा nominee की सहमति ज़रूरी नहीं है।
26 दिसंबर 2014 से लागू संशोधन के बाद nominee की स्थिति इस पर निर्भर करती है कि वह कौन है। जहाँ अपने ही जीवन पर पॉलिसी रखने वाला व्यक्ति माता-पिता, पति/पत्नी या संतान को nominee बनाता है, वहाँ वह nominee उस पैसे का beneficially entitled (असली हकदार) होता है। कोई और nominee, जैसे दोस्त या भाई-बहन, बीमा कंपनी से पैसा तो लेता है लेकिन उसे कानूनी वारिसों के लिए रखता है। वारिस यह पैसा उस succession law के हिसाब से पाते हैं जो उन पर लागू होता है।
Assignment: पॉलिसी किसी और के नाम करना
Section 38 के तहत assignment पॉलिसी के अधिकार किसी और को दे देता है। इसके लिए पॉलिसी पर endorsement या एक अलग instrument चाहिए, जिस पर दस्तखत हों और गवाह के दस्तखत हों, और बीमा कंपनी को नोटिस देना होता है। बीमा कंपनी इसे दर्ज करने से मना कर सकती है, और उसे 30 दिन के भीतर वजह बतानी होती है।
Absolute assignment में सारे अधिकार, title और interest पूरी तरह और बिना किसी शर्त के दूसरे के पास चले जाते हैं: मूल पॉलिसीधारक के पास कुछ नहीं रहता। Conditional assignment में अधिकार उस शर्त के साथ दिए जाते हैं जो उसमें लिखी होती है। Assignment का इस्तेमाल आम तौर पर लोन देने वाले को लोन की security देने के लिए होता है।
जब nomination और assignment साथ आते हैं
Assignment पहले से मौजूद nomination को रद्द कर देता है, बस एक मामले को छोड़कर। Section 39(4) के तहत, लोन की security के तौर पर किया गया assignment nomination को रद्द नहीं करता, चाहे वह पॉलिसी लोन के लिए बीमा कंपनी के नाम हो या बैंक जैसे किसी और लोन देने वाले के नाम। तब nominee के अधिकार लोन देने वाले के हित के बाद आते हैं: मृत्यु होने पर पहले लोन देने वाले को उसका बकाया चुकाया जाता है, और बाकी रकम nominee को मिलती है।
क्लेम और उनकी समय-सीमाएँ
Death क्लेम के साथ क्लेम फ़ॉर्म, death certificate, पॉलिसी का दस्तावेज़ और क्लेम करने वाले की पहचान व बैंक की जानकारी लगती है, और जहाँ ज़रूरी हो वहाँ मेडिकल या अस्पताल के रिकॉर्ड भी।
IRDAI के 5 सितंबर 2024 के Master Circular के तहत, जिस death क्लेम में जाँच की ज़रूरत नहीं है उसे सूचना (intimation) के 15 दिन के भीतर settle करना होता है। जहाँ जाँच की ज़रूरत हो, वहाँ बीमा कंपनी को intimation के 45 दिन के भीतर जाँच पूरी करके क्लेम settle करना होता है। पुरानी सामग्री में सारे दस्तावेज़ मिलने से 30 दिन और जाँच के लिए 90 दिन या उससे ज़्यादा लिखा मिलता है। Maturity क्लेम due date पर चुकाया जाता है, और बीमा कंपनी पॉलिसीधारक को कम से कम एक महीने पहले सूचना देती है। तय समय से ज़्यादा देरी होने पर बीमा कंपनी bank rate से 2% ऊपर की दर से ब्याज देती है।
नियम एक नज़र में
दोस्त nominee हो तो
उदाहरण: सुरेश अविवाहित हैं। वे अपने एक करीबी दोस्त को nominee बनाते हैं और बिना वसीयत के उनकी मृत्यु हो जाती है। बीमा कंपनी क्लेम दोस्त को चुकाती है। दोस्त माता-पिता, पति/पत्नी या संतान में से नहीं है, इसलिए वह यह पैसा सुरेश के कानूनी वारिसों के लिए रखता है, उस succession law के हिसाब से जो उन पर लागू होता है। अगर सुरेश ने अपनी माँ को nominee बनाया होता, तो वे इस पैसे की beneficially entitled (असली हकदार) होतीं।
बैंक के नाम assign की गई पॉलिसी, और क्लेम की टाइमलाइन
- मान लीजिए (सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए): sum assured ₹50,00,000; पॉलिसी लोन की security के तौर पर बैंक के नाम assign है; मृत्यु के समय बैंक का बकाया ₹12,00,000; nominee पॉलिसीधारक की पत्नी हैं।
- बैंक, assignee होने के नाते, पहले पैसा पाता है: ₹12,00,000।
- Nominee को बाकी रकम = ₹50,00,000 − ₹12,00,000 = ₹38,00,000।
- टाइमलाइन: मृत्यु की सूचना 1 अगस्त को दी जाती है। जाँच न हो, तो 15 दिन 16 अगस्त को पूरे होते हैं। जाँच की ज़रूरत हो, तो 45 दिन 15 सितंबर को पूरे होते हैं।
नतीजा। बैंक को ₹12,00,000 मिलते हैं और nominee को ₹38,00,000। क्लेम 16 अगस्त तक settle होना है, या जाँच हो तो 15 सितंबर तक।
मुख्य बातें
- Nomination section 39 के तहत चलता है; assignment section 38 के तहत।
- अपने ही जीवन पर पॉलिसी रखने वाला व्यक्ति जिस माता-पिता, पति/पत्नी या संतान को nominee बनाता है, वह beneficial nominee होता है; कोई और nominee कानूनी वारिसों के लिए पैसा लेता है।
- Assignment nomination को रद्द कर देता है, जब तक कि वह लोन की security के तौर पर न किया गया हो; तब पहले लोन देने वाले को चुकाया जाता है।
- Death क्लेम: intimation से 15 दिन, या जहाँ जाँच की ज़रूरत हो वहाँ 45 दिन; maturity क्लेम due date पर।
आम ग़लतफ़हमियाँ
- Nominee हमेशा पैसे का आखिरी मालिक नहीं होता: सिर्फ़ वही माता-पिता, पति/पत्नी या संतान beneficially entitled (असली हकदार) हैं जिन्हें life assured ने nominee बनाया हो।
- Nomination और assignment एक ही चीज़ नहीं हैं। Nomination बताता है कि मृत्यु होने पर पैसा किसे मिलेगा, जबकि assignment पॉलिसी के अधिकार अभी दूसरे को दे देता है।
- लोन देने वाले के नाम assignment से nomination खत्म नहीं होता: लोन देने वाले को चुकाने के बाद जो बचता है, वह nominee को ही मिलता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
क्या nomination बदलने के लिए मौजूदा nominee की रज़ामंदी चाहिए?
नहीं। Nomination बदलने के लिए सिर्फ़ पॉलिसीधारक का बीमा कंपनी को लिखकर दिया गया अनुरोध चाहिए।
अगर बीमा कंपनी क्लेम देर से settle करे, तो उसे क्या देना होता है?
IRDAI के दिए समय से जितनी ज़्यादा देरी हो, उस पर bank rate से 2% ऊपर की दर से ब्याज।
क्या death क्लेम के लिए मृतक के income-tax return चाहिए?
नहीं। वे ऊपर बताए गए आम दस्तावेज़ों में शामिल नहीं हैं।
यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है
- Insurance Act, 1938 — sections 38 और 39 (26 दिसंबर 2014 से बदले हुए रूप में)
- IRDAI Master Circular on Protection of Policyholders' Interests (5 सितंबर 2024) — क्लेम settle करने की समय-सीमाएँ
इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

