लेसन 5 / 8 · जोखिम, रिटर्न और Performance

Performance Attribution — रिटर्न किससे बनता है?

Performance attribution फंड के रिटर्न और उसके benchmark के रिटर्न के फ़र्क को उन फ़ैसलों में बाँटता है जिनसे वह फ़र्क बना। यह लेसन allocation effect और selection effect, interaction term, और attribution क्या दिखा सकता है और क्या नहीं, यह समझाता है।

तथ्य-जाँच: 8 अक्टूबर 2026गेम में 3 प्रैक्टिस सवाल

Attribution किस सवाल का जवाब देता है

यह जान लेने से कि फंड अपने benchmark से आगे रहा या पीछे, यह पता नहीं चलता कि ऐसा क्यों हुआ। Performance attribution दोनों रिटर्न के फ़र्क को, यानी excess return को, लेता है और उसे उसके पीछे के फ़ैसलों में बाँटता है।

यह तुलना से काम करता है। हर sector या asset class के लिए फंड के weight और रिटर्न को benchmark में उसी sector के weight और रिटर्न के बगल में रखा जाता है।

Allocation और selection

Allocation effect इस बात से आता है कि किसी sector या asset class में benchmark से ज़्यादा या कम रखा गया। अगर फंड किसी ऐसे sector में ज़्यादा रखता है जो आगे चलकर पूरे benchmark से बेहतर करता है, तो उस overweight से हुआ gain allocation effect है।

Selection effect इस बात से आता है कि किसी sector के भीतर चुनी गई खास securities ने benchmark के उस sector से बेहतर किया या खराब। यह फंड की होल्डिंग को उस sector के सामने नापता है, पूरे बाज़ार के सामने नहीं।

दोनों का कुछ हिस्सा एक-दूसरे पर चढ़ता है (overlap): फंड किसी sector में ज़्यादा भी रख सकता है और उसके भीतर ऐसी securities भी चुन सकता है जो बेहतर करें। इस overlap को interaction term समेटता है। Timing कभी-कभी अलग से नापी जाती है।

रिटर्न पर असर डालने वाली दूसरी चीज़ें

Style analysis इससे जुड़ा एक tool है: यह पोर्टफोलियो के झुकाव देखता है, जैसे growth बनाम value, या बड़ी बनाम छोटी कंपनियाँ।

Expense ratio जैसे खर्च फंड का रिटर्न घटाते हैं। ये फंड और benchmark के बीच के फ़र्क का हिस्सा हैं, पर ये दो मुख्य effect में से नहीं हैं।

Attribution क्या नहीं दिखा सकता

Attribution सिर्फ़ बीती हुई अवधि को समझाता है। कोई effect हुनर के साथ-साथ किस्मत का भी नतीजा हो सकता है: positive selection effect को अक्सर stock-picking का संकेत माना जाता है, पर एक अवधि से इन दोनों को अलग नहीं किया जा सकता।

नतीजा उसी benchmark से बँधा होता है जिसके सामने उसे नापा गया। यह आगे के नतीजों के बारे में कुछ पक्का नहीं कहता।

उदाहरण

Effect को नाम देना (उदाहरण)

एक फंड automobile shares में 20% रखता है जबकि उसके benchmark में 12% है, और उस साल automobile sector पूरे benchmark से बेहतर करता है। उस sector में 8 percentage point ज़्यादा रखने से हुआ gain allocation effect है।

उसी साल फंड के banking shares का रिटर्न benchmark के banking sector से कम रहता है। यह कमी selection effect है, और यह negative है। एक ही फंड एक ही अवधि में एक तरह का positive effect और दूसरी तरह का negative effect दिखा सकता है।

हिसाब के साथ उदाहरण

दो sector का attribution (उदाहरण)

  1. मान लीजिए (सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए)। Benchmark में sector X में 50% और sector Y में 50% है; साल में sector X का रिटर्न 20% और sector Y का 10% रहता है। Benchmark का रिटर्न = (0.5 × 20) + (0.5 × 10) = 10 + 5 = 15%।
  2. फंड X में 70% और Y में 30% रखता है। उसके X shares का रिटर्न 20% है, जो sector के बराबर है; उसके Y shares का रिटर्न 14% है। फंड का रिटर्न = (0.7 × 20) + (0.3 × 14) = 14 + 4.2 = 18.2%। Excess return = 18.2 − 15 = 3.2 percentage point।
  3. Allocation: फंड के weights पर लेकिन benchmark के sector रिटर्न के साथ, रिटर्न होता (0.7 × 20) + (0.3 × 10) = 14 + 3 = 17%। Allocation effect = 17 − 15 = 2.0 percentage point।
  4. Selection, benchmark के weights पर: फंड के Y shares ने sector Y से 14 − 10 = 4 percentage point ज़्यादा किया, और उसके X shares sector X के बराबर रहे। Selection effect = 0.5 × 4 = 2.0 percentage point।
  5. Interaction: फंड ने Y में 30% रखा, 50% नहीं, इसलिए weight का फ़र्क 0.3 − 0.5 = −0.2 है। Interaction = −0.2 × 4 = −0.8 percentage point।
  6. जाँच: 2.0 + 2.0 − 0.8 = 3.2 percentage point, यानी excess return।

नतीजा। 3.2 percentage point के excess return में से 2.0 allocation से आया, 2.0 selection से और −0.8 इन दोनों के interaction से।

मुख्य बातें

  • Attribution फंड के अपने benchmark के ऊपर के excess return को उसके पीछे के फ़ैसलों में बाँटता है।
  • Allocation effect किसी sector या asset class में benchmark से ज़्यादा या कम रखने से आता है।
  • Selection effect इस बात से आता है कि किसी sector के भीतर चुनी गई securities ने benchmark के उस sector से बेहतर किया या खराब।
  • Interaction term दोनों के overlap को समेटता है; timing कभी-कभी अलग से नापी जाती है।
  • खर्च रिटर्न घटाते हैं, पर वे दो मुख्य effect में से नहीं हैं।
  • कोई effect हुनर के साथ-साथ किस्मत का भी नतीजा हो सकता है, और attribution सिर्फ़ बीती हुई अवधि की बात बताता है।

आम ग़लतफ़हमियाँ

  • किसी sector में ज़्यादा रखने से हुआ gain selection effect नहीं है। वह allocation effect है।
  • Expense ratio दो मुख्य effect में से नहीं है। खर्च रिटर्न घटाते हैं, पर मुख्य बँटवारा allocation और selection का है।
  • Positive selection effect से हुनर साबित नहीं होता। यह किस्मत का नतीजा भी हो सकता है, और यह आगे के नतीजों की गारंटी नहीं देता।

लोग अक्सर पूछते हैं

Selection effect की तुलना किससे की जाती है?

Benchmark के उसी sector से, पूरे benchmark से नहीं।

Interaction term क्यों होता है?

क्योंकि allocation और selection के फ़ैसले एक-दूसरे पर चढ़ते हैं: किसी sector में चुनी गई securities का असर इस पर निर्भर करता है कि फंड ने उस sector में कितना रखा था।

क्या attribution बताता है कि फंड अगले साल कैसा करेगा?

नहीं। यह सिर्फ़ बीती हुई अवधि को समझाता है और आगे के नतीजों के बारे में कुछ पक्का नहीं कहता।

यह लेसन किन स्रोतों पर आधारित है

  • SEBI Master Circular for Mutual Funds, 20 मार्च 2026 — वे benchmarks जिनसे scheme performance की तुलना की जाती है
  • Performance attribution में allocation, selection और interaction effects की आम परिभाषाएँ (सीधा हिसाब)

इस लेसन के अंग्रेज़ी मूल को इन स्रोतों से मिलाकर स्वतंत्र रूप से जाँचा गया है (8 अक्टूबर 2026)। यह उसी का हिन्दी अनुवाद है, जिसे अंग्रेज़ी से मिलाकर अलग से जाँचा गया है। नियम बदलते रहते हैं: किसी भी आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording देख लें। यह सिर्फ़ शिक्षा है, सलाह नहीं।

Trustner Group की ओर से मुफ़्त पढ़ाई। Trustner Academy, Trustner Group की एक शिक्षा पहल है। ग्रुप की कंपनियाँ insurance broking और निवेश सेवाओं में काम करती हैं, और इसके दफ़्तर बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में हैं। यहाँ की हर चीज़ सिर्फ़ सीखने के लिए है — यह कोई सलाह, सिफ़ारिश या किसी प्रोडक्ट का ऑफ़र नहीं है। दी गई स्थितियाँ सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं। नियम और आँकड़े बदलते रहते हैं; किसी भी बात पर अमल करने से पहले मौजूदा regulation, scheme document या policy wording ज़रूर देख लें।